Friday, November 16, 2018

Shri Ganesh Prasad Varni

Poem on Shri Ganesh Prasad Ji Varni

अहार जी सिद्ध क्षेत्र से प्राप्त वर्णी जी पर कविता 


गुरू वर्णी ज्ञान समुंदर से निकले शतकों निर्मल मोती
जो आज यहां भारत भर में, विद्या की जला रहे ज्योति॥  

बह ज्ञान सिंधू विद्या सागर, जैनागम के उत्तम सैनिक
श्री बिशुद्ध सिंधू दिखलाते हैं, अध्यात्म की पावन ऐनिक॥

जीवन की दशा बदल जाती, जिनकी सुनकर गाथाओं को
पथ भटके मंजिल पा जाते, जिनके लखकर हर कार्यों को॥

गुरू वर्णी जी ने जगह जगह, जिनधर्म पताका फहराई,
शतकों विद्यालय खुलवाये, आगम की राह दिखलाई॥

बह जैन धर्म के न्यायाधीश, इस युग की श्रेष्ठ धरोहर थे
सिद्धांतपरक जीवन उन्नत, समता के बृहद सरोवर थे॥
यह पावन जीवन चारित्र है, गुरू वर्णी ज्ञान हिमालय का
जिसने हर दिल को जीता था, उस आध्यात्म के आलय का॥



Tuesday, October 23, 2018

Papaura Ji Jain Tirth of Bundelkhand


बुंदेलखण्ड के जैन तीर्थ : श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पपौरा जी

बुंदेली जैन तीर्थ : पपौरा जी
मन्दिरों का ही जहाँ मेला भरा, वहाँ बतलाओ क्या नहिं पाओगे।
दीप धूप सुगन्ध जल से थार भर, जब पपौरा क्षेत्र पर तुम जाओगे।। 1।।
भव्य भावों से भरा हो तुम हृदय, क्या जरूरत है किसी सामान की।
बिन ही माँगे पाओगे अक्षय सुमन, नाहिं कमी तुमको मिले मिष्ठान की।। 2।।
चांदनी ही रात में रजनी पति, मन्दिरों की ओट में आकर बसे।
कभी कंगरो पर इधर से उधर जा, शिखर पर जाकर बहुत सुन्दर लसे ।। 3।।
जिनालय शोभित अनूपम, प्रकृति का संग प्राप्त करके।
कला मानव की छिपाये, जगत का उद्धार करके।। 4।।
खड़े हैं यह युग-युगों से, कह रहे बीती कहानी।
कौन कहता मौन हैं वे, कह रहे जब साफ वानी।। 5।।
है नहीं विश्वास तो, जाकर करो तुम प्रश्न झटसे।
आयेगी आवाज निश्चय, प्रशन के पीछे ही पट से।। 6।।
जीर्ण हैं श्रुत क्षीण हैं, बात करना जोर से तुम।
लौटकर नहिं शीघ्र कह दो,      झूठ ही कह रहे हो तुम।। 7।।
प्रति ध्वनि देगी सुनाई, यही उत्तर तुम्हीं जानो।
अर्थ समझो या न समझो, स्वयं की यह भूल मानो।। 8।।
उन जिनालय के लिए, जो कर रहे हैं चमत्कार
बार-बार युगल कर कर, कर रहा हूँ नमस्कार।।


Poem By Shri Baboo Lal Jain Digora M.P.

Thursday, January 4, 2018

Ahar Ji Jain Tirth

बुंदेलखण्ड के जैन तीर्थ : श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र अहार जी, टीकमगढ़ - Shri Digambar Jain Sidhha Kshetra Aharji, Tikamgarh


बुंदेलखण्ड के जैन तीर्थ : श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र अहार जी (टीकमगढ़) मध्य प्रदेश 
Bundelkhand's Jain Shrine - Shri Digambar Jain Sidhha Aharji, Tikamgarh (M.P.)

This article published on Bundelkhand.in 

http://www.bundelkhand.in/tikamgarh/jain-shrine-shree-digambar-jain-siddh-ahar-ji

Tuesday, December 26, 2017

यातायात में जल्दबाजी का परिणाम

यातायात में जल्दबाजी का परिणाम

जिन्हें जल्दी थी,वह इस दुनिया से चलेगये?
अब भेजने बाले भी जल्दी मचा रहे हैं?
घाट तक पहुंचाकर, जल्दी फुरसत होने के लिये !
मैं देख रहा हूं? रास्ते में भी कुछ लोग,
मुझे ओवर टेक करने की कोशिश कर रहे हैं !
ये लोग जानते नहीं कि मैं भी
इसी जल्दबाजी के चक्कर में, आज घाट पहुंच गया हूं।
और अपने प्रिय जनों से दूर अकेला हो गया हूं!!!

मित्रो…..!! तुम्हारे लिये अभी भी समय है,
मेरे अनुभव का लाभ ले लो
सावधानी से चलो, यातायात के नियमों का पालन करो,
और परिवार व मित्रों के साथ आनंद से जीवन जियो।
बरना मेरी तरह,
“तुम्हें तथा तुम्हारे परिवार” को भी पछताना पड़ेगा!
अब यह सिर्फ मेरी सलाह है, निर्णय आपको ही करना है,
बरना एक बार पुन: चारों ओर गूंज उठेगा कि ॥राम नाम सत्य है॥

लेकिन मुझे तुम्हारा साथ मिल जायेगा...॥हा हा हा..॥ 

Wednesday, December 13, 2017

Gour Jayanti 2017 at Varanasi


Dr. Hari Singh Gour Jayanti held at Varanasi on 26th November 2017.


Book Released : Lokarpan 

Monday, September 18, 2017

Baboo Lal Jain



श्री बाबूलाल जैन सुधेशका जन्म टीकमगढ़ जिले के मबई ग्राम 28 जून 1934, ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा सं.1991 में हुआ था। आप टीकमगढ़ जिले के अनेक विद्यालयों मबई, अहार, दिगौड़ा, नुना महेवा,खरगापुर, मालपीथा, लिधौरा आदि में शिक्षण का कार्य करते हुये दिगौड़ा से सन 1993 में सेवानिवृत्त हुये।
आप बचपन से ही लेखनकार्य में व्यस्त रहे। आपने कविताओं के साथ साथ अहार का इतिहास तथा जैत माता आदि पर लेख लिखा। जैन धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में संलग्न रहते हुये आप दिगौड़ा ग्राम में निवासरत हैं॥

Shri Baboo Lal Jain is a retired Teacher who served the various schools of Tikamgarh district. It includes Mabai, Digora, Nuna-Maheba, Bamhauri-Barana, Malpitha, Lidhaura and Digora.

He worked with full dedication. He was participated in Indian independence movement (Bharat Chhodo Andolan) as a school child, but never claimed as Freedom Fighter.

He is a great thinker of social problems and nation. He resides in a small village at Mabai (Tikamgarh). But he always worried about Nation? We can see it from his poetry.

One can see and feel his pain by the reading his poems “Swatantra Rachnawali”

It  includes poem on Goa ki Samasya, Chini Akraman, Vinoba Bhave on Bhudan, etc.

He participated and conducted all Elections from 1952 to 1991.


He is living religious social life at village Digora, Tikamgarh, M.P.  

Thursday, March 23, 2017

सूचना तंत्र का मायाजाल

सूचना तंत्र का मायाजाल
Side Effects of Social Media and Internet
  
हमारे ऋषि मुनियों ने जिस भारतीय संस्कृति और परम्परा को सदियों से बचा कर रखा था, आज उसे इण्टरनेट, वर्ल्ड वाइड बेव, मोबाइल, सोसल मीडिया, डीटीएच आदि ने हिला कर रख दिया। इसी पर एक टिप्पड़ी :

रामायण और महाभारत सीरियल के साथ
भारतीय घरों मे टीवी ने प्रवेश किया,
फिर आ गया केबिल और डी टी एच।
फिर धीरे से मोबाइल आया और आ गया इण्टरनेट
तेजी से फैला सोसल मीडिया और सूचना का जाल
अब बन गया है हम सभी के लिये एक बड़ा जंजाल
                                                                          
मोबाइल ने लोगों को लालच दिया, कर लो दुनिया मुट्ठी में,
फिर जिओ / 4जी आया, फ्री इण्टरनेट के साथ युवाओं को रिझाने
सूचना के अथाह समुद्र में डुबकी लगवाने !
बाजारबाद के चक्कर में, युवा हो गया दिग्भमित,
लक्ष्य को भूलकर, फंस गया
आधुनिक सूचना तंत्र के माया जाल में !
अपना कीमती समय और शक्ति दौनों गंवा बैठा 
ऑनलाइन के चक्कर में सतही ज्ञान पाया,
सही लिखना पढ़ना, बोलना भी भूल गया

मेरी एक सलाह
तकनीकि का उपयोग करें, मगर उसके गुलाम ना बनें,
अभी भी बक्त है यदि लौट सको तो !
बरना !
सिर्फ पछ्तावा रह जायेगा.....
और बीता समय
कभी बापिस नहीं आयेगा॥

डा. विवेकानंद जैन
वाराणसी 23/03/2017