Thursday, May 8, 2014
My article in Library Review (Emerald)
It is now open access from Emerald.
for full text click on DOI (Permanent URL): 10.1108/00242531311328159
Friday, March 21, 2014
Friday, February 28, 2014
शिक्षा की नींव School Education System
शिक्षा की नींव
नींव जिसकी खोखली हो, भवन कैसे खड़ा होगा।
जड़ नहीं मजबूत जिसकी, बृक्ष कैसे बड़ा होगा।
पांच वर्षों तक नहीं
जिस छात्र की नहीं कोई परीक्षा
नाम केवल दर्ज हो, उत्तीर्ण होगा पांच कक्षा॥
आठवीं तक भी यही
विधि, शीघ्र करने जा रहे हैं
देश को उत्थान में
या गर्त में ले जा रहे हो?
राष्ट्र के ओ कर्ण धारो, ज्ञान में मत धूल झोंको।
आंकड़ों के खेल में मत, छात्र का सर्वस्व फूंको॥
निकल पायेगा भला
क्या, कोई वैज्ञानिक सितारा।
करे आविष्कर कुछ भी, लग रहा तुमको इशारा?
निजी बच्चों के लिये
तो, आंग्ल माध्यम पाठ्शाला॥
दीन हीन कृषक जनों
के बालकों को नृत्य शाला॥
चित्र शाला, गीतशाला से नहीं कुछ काम होगा।
अगर ऐसा ही रहा तो, देश फिर बदनाम होगा।
ज्ञान के इस क्षेत्र
में मत कीजिये कुछ ढील ढाल
ठोस होगी नीव तो यह
देश बन जाये खुशहाल ॥
(बाबू
लाल जैन ‘सुधेश’: व्यक्तिगत डायरी से
साभार, 12/08/2004)
Keywords : School Education System in India
Tuesday, February 18, 2014
AIP Library Workshop at IAS, BHU
(Jointly organized by Banaras Hindu University, USAID, AIP and Cornell University)
Dr. Vivekanad Jain presented a paper on
Role of Cyber Library in Higher Education & Research.
Cyber library is a new concept of
round the clock accessibility of online resources in network environment. It
started recently in Banaras Hindu University with a dedicated cyber Hall
equipped with more than 200 computers. It is expected that it enhanced the use
of subscribed e-resources and online journals available through UGC-INFONET,
INDEST and ERMED Consortia to BHU. It also improves teaching, learning and
research productivity of the university.
It was inaugurated by Dr. Karan Singh,
Hon’ble Chancellor of Banaras Hindu University on 3rd March 2013. It
is excessively used by the students and researchers of BHU.
Thursday, December 19, 2013
Tuesday, December 3, 2013
भारत को रहने दो अखण्ड
भारत को रहने दो अखण्ड
सैकड़ों राज्य राजाओं के, सब मिटा बनाये बड़े प्रांत।
सब रहें देश बासी हिल मिल, नहिं रहे कहीं कोई अशांत॥
नेहरू पटेल का सोच यही, साकार किया था जो सपना।
विघटन करने को लोग खड़े, भरने को पेट केवल अपना॥
उठ रही मांग पूर्वांचल की, कुछ चाह रहे बुंदेल ख़ण्ड।
मिथिलांचल बोडो लेण्ड आदि, कुछ चाहेंगे बघेल ख़ण्ड॥
तेलंगाना का शोर मचा, बाहन
फूंके दे लगा आग।
छ्ह सौ राजा के राज्य
पुन: दे दो गायें ए नया राग।
आसाम प्रांत को तो देखो, कर दिया सात भागों में बिभक्त।
भारत का यह पुर्वी हिस्सा, हो गया आज कितना अशक्त॥
यह मधुकोड़ा सम मधु
कीड़े, जो लूट रहे देश का धन पराग।
कर रहे विदेशों में धन
संचय, लग जाये यहां पर भले आग ॥
कुर्सी की केवल पकड़ इन्हें, सब चाह रहे मंत्री बनना।
घर भर जाये धन धान्य से, फिर नहीं इन्हें कुछ भी
कहना ॥
इन नेताओं से रखो बचा, मत
करो देश के खण्ड खण्ड ।
यह भारत बन जाये
प्रचण्ड, भारत को रहने दो अखण्ड ॥
रचयिता : श्री बाबू
लाल जैन “सुधेश”
दिगौड़ा जिला टीकमगढ़
(मध्य प्रदेश)
Sunday, March 3, 2013
काशी हिन्दू विश्व विद्यालय
महामना की अनुपम
रचना: काशी हिन्दू विश्व विद्यालय
मानवता के घाव भरता - चिकित्सा विज्ञान संस्थान
लोगों की भूख मिटाता - कृषि विज्ञान संस्थानपर्यावरण को समर्पित - पर्यावरण और जैव विकास संस्थान
देश की प्रगति में सहायक - प्रौद्योगिकी संस्थान
धर्म संस्कृति का रक्षक: काशी हिन्दू
वि.वि.
सर्व धर्म समभाव का पोशक: काशी हिन्दू वि.वि.मानवीय मूल्यों को समर्पित: हमारा काशी हिन्दू वि.वि.
भारत माँ की शान बढ़ाता देश को सम्मान दिलाता
ऐसे विश्व विद्यालय के निर्माता
मालवीय जी को मेरा नमन
अभिनन्दन ।।
विवेकानन्द जैन
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